5 अप्रैल की रात पटाखे छोड़े जाने का हवा की क्वॉलिटी पर क्या रहा असर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर पूरे भारत में 5 अप्रैल को रात 9 बजकर 9 मिनट तक दीए जलाए गए. ये उन मेडिकल स्टाफ से एकजुटता दिखाने के लिए किया गया जो घातक कोरोना वायरस से लड़ाई में दिन-रात जुटे हुए हैं. कोरोना वायरस मंगलवार सुबह 9 बजे तक देश में 4400 से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर चुका था. Covid-19 बीमारी से देश में 100 से ज्यादा लोगों की जान भी जा चुकी है.


प्रधानमंत्री ने नागरिकों से दीए और मोमबत्ती से प्रकाश करने के लिए कहा था. लेकिन कई जगह कुछ लोगों ने पटाखे भी फोड़े. देश 25 मार्च से ही पूरी तरह लॉकडाउन में है. इस वजह से आबोहवा पर अच्छा असर पड़ा और वायु की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) पहले की तुलना में कहीं बेहतर हो गई.


बता दें कि हर साल दीवाली के त्योहार पर पटाखे छोड़े जाने से हवा में जहर घुलने की सीमा उच्चतम स्तर तक पहुंच जाती है? क्या 5 अप्रैल की रात को भी ऐसा हुआ?


इंडिया टुडे डेटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने अहम पॉल्यूटेंट PM 2.5 को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराए आंकड़ों का विश्लेषण किया. इससे सामने आया कि देश के अधिकतम शहरों में PM 2.5 के स्तर में वृद्धि नगण्य थी.


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क्या पड़ा था PM2.5 पर असर?


DIU ने देश के 9 शहरों में PM 2.5 के स्तर को मापा. ये शहर हैं- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, अहमदाबाद और बेंगलुरु.


रविवार को सुबह 9.30 बजे PM 2.5 स्तर लखनऊ में 64, Kolkata में 59 और दिल्ली में 53 था. बाकी सभी शहरों में PM 2.5 का स्तर 50 से नीचे था जो कि वायु की अच्छी गुणवत्ता का प्रतीक है. कमोवेश सभी 9 शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) या तो अच्छा या संतोषजनक रहा.


इससे 24 घंटे पहले यानी शनिवार को पटाखे छोड़े जाने से पहले PM 2.5 लखनऊ में 60, कोलकाता में 53 और दिल्ली में 47 था. ये देखा गया कि 5 अप्रैल रात को पटाखे छोड़े जाने के दो घंटे बाद यानी 11.30 बजे PM 2.5 स्तर लखनऊ में 101, दिल्ली में 91, जयपुर में 56 और अहमदाबाद में 96 था.


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इससे प्रतीत हो सकता है कि प्रदूषण का स्तर एक या दो घंटे बाद बढ़ा. लेकिन लखनऊ में 1 अप्रैल (रात 10 बजे) PM 2.5 स्तर 103 था, जब कोई पटाखे नहीं फोड़े गए थे.


दिल्ली में PM 2.5 का 91 का स्तर लॉकडाउन के दिनों में दूसरा सबसे ऊंचा रहा. दिल्ली में लॉकडाउन के दूसरे दिन यानी 26 मार्च को रात 12 बजे PM 2.5 स्तर 97 था, तब भी दिल्ली में कोई पटाखे नहीं चलाए गए थे. दूसरे शहरों में भी हवा में PM 2.5 स्तर अच्छी स्थिति में रहा यानि 50 से नीचे.


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गौर करने वाली बात है कि दीवाली पर पटाखों के अलावा अन्य कई फैक्टर भी हवा की क्वालिटी खराब करते हैं. जैसे कि हवा की दिशा, हवा की रफ्तर, कम तापमान, पराली का जलाया जाना आदि. इसके अलावा उद्योग और वाहनों के चलने से भी प्रदूषण बढ़ता है. फिलहाल लॉकडाउन की वजह से ये बंद हैं इसलिए प्रदूषण स्तर खतरनाक सीमा तक नहीं पहुंचा. भारतीय मानकों के हिसाब से हवा की क्वालिटी संतोषजनक रही.